परम आदरणीय सभापति, महोदय, दूर-दराज से आये हुए सज्जनों एवं शिक्षकगण और मेरे सहपाठियों, मेरा नाम शिवानी कुमारी है, मैं वर्ग 9 की छात्रा हूँ। इस शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर मैं आप लोगों के सामने दो शब्द कहने जा रही हूँ। मैं कोई गायक या वकता नही हू जो मैं अपनी वाणी से आपलोगों को संतुष्ट कर सकूं इसलिए मेरे कहने में जो कुछ भी त्रुटियाँ होंगी, मुझे एक नादान बालिका समझकर क्षमा करें।
1. ll " रोशनी बनकर आए जो हमारे जिंदगी में, ऐसे गुरुओं को मैं प्रणाम करती हूं।...2

जमीं से आसमान तक पहुंचने का जो रखते है हुनर।...2

ऐसे गुरुओं को मैं दिल से सलाम करती हूं।...2 ll

2. ll "गुमनामी के अंधेरे में था, पहचान बना दिया...2
दुनिया के गम से मुझे, अनजान बना दिया...2
उनकी ऐसी कृपा हुई, गुरु ने मुझे एक अच्छा इंसान बना दिया" ll

3. ll "जिंदगी गिरवी रखकर भी...2, ना चुका पाएंगे जिसका कर्जा"
"मां ही नहीं भगवान के बराबर...2, गुरु का भी है उत्नाभी महान दर्जा"।
"भगवान को भी भगवान बनने के लिए...2, गुरु का ही ज्ञान काम आया था"।
"मां ने तो उंगली थाम कर कहा था चलो, पर चलना कहा है यह गुरु ने सिखाया था" ll




आज 5 सितंबर है, यह दिन हमारे भारत देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। सबसे पहले आप सभी को शिक्षक दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं। हमारे देश के दूसरे राष्ट्रपति और आदर्श शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर को हुआ था, उनका जन्मदिवस हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं।

माँ हमें जन्म देती है, लेकिन सही और गलत का फर्क हमें शिक्षक सिखाते हैं। वे हमें सही मार्गदर्शन करते हैं। शिक्षक के बिना हम जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं। वे हमारे अंदर की बुराइयों को दूर कर हमें एक अच्छा इंसान बनाने में काफी मेहनत करते हैं।

अंत में मैं इतना कहना चाहूँगी कि,

ll " जीने की कला सीखते शिक्षक, ज्ञान की कीमत बताते शिक्षक"
"पुस्तकों के होने से कुछ नही होता, अगर मेहनत से नहीं पढ़ते शिक्षक" ll

जय हिंद!
धन्यवाद!

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